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ध्यान (Meditation)

ध्यान

वर्तमान में अधिकतर मनुष्य सतत तनावमें रहता है। इसलिए वर्तमानमें “ध्यान साधना” बहुत ही जरूरी है|

तनाव मनुष्यके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर करता है। जिसका असर शरीर पर पड़ता है। चालीस वर्ष की आयुमें वह मधुमेह, बीपी और कई अन्य बीमारियों से ग्रसित होता जाता है. इन सभीमे हम यदि “ध्यान साधना” को समझे तो वह ही विशुद्ध रूप मानवीय मन और मस्तिष्क को आराम दे पाती है और मनुष्यको सहज स्वास्थय प्रदान करती है। यदि व्यक्ति नियमित रूप से ध्यान करता है, तो उसकी सभी परेशानियां दूर हो सकती है पर उसे ध्यान के सही तरीके को समझना और उसे नियमित रूपसे अमलमे लाना जरुरी है |

आमतौर पर ध्यानका अर्थ है एक चित। अब जब एक चित के बारे में बात की जाती है, तो जो लोग इसे एकाग्रताके रपमे ही समझते है। वास्तव में ध्यान एकाग्रता नहीं समग्रता है। यदि आप कोई इकाई पर एकाग्र होते है आपकी सारी दुनिया इकाई के आलावा समाप्त हो जाती है। जबकी आप समग्र होते है तब आप पूरी तरह से सभी पहलुओं के बारेमे जागृत रह पाते है।

अब हम इसे अलग तरह से समझते हैं। हमारे शरीरमें चेतना सहज उपस्थित रहती है. वह पैरों की उंगलियोंसे लेकर सिर के ब्रह्मरंध में सहज गतिशील रहती है और आपको लगातार अपनी उपस्थिति से प्रभावित करती रहती है। एक चित्त यानि इस व्याप्त चेतना को देखना यही होता है. इस चेतनाके प्रत्येक आंदोलन पर ध्यान करना यही है. अगर साधक यह कर पाएगा तब भी यह अपने आपमें बड़ी उपलब्धि है. साथ ही यह समझना भी जरूरी है की यह सभी चीजे बिना किसी प्रयास सहजता से होनी चाहिए, अर्थात यह प्रयत्न-रहित प्रयत्न होना चाहिए |

ध्यान का अर्थ है सहजता । इस प्रकार का ध्यान करने से आप शतावधानी (एक साथ सौ चीजे ध्यानमें रखना) हो सकते हैं और जीवन से संपूर्ण तनावमुक्त हो सकते हैं।जो निरंतर तनाव में रहता है, जो लगातार अवसाद में रहता है, उस एक साधक को अवसाद से बाहर निकाल कर सभी प्रकार की समस्याओं से लड़ने के लिए प्रेरणा और शक्ति यह “ध्यान साधना” प्रदान करती है।

अगर आपको ऐसा लगता है तो आपको भी ध्यान साधनाकी इस विधिसे कुछ मिलेगा तो जरूर आइए बैठिये और अनुभव कीजिए।